श्रीमद्भगवद्गीता सार हिंदी में | Shrimad Bhagavad Gita Saar in Hindi

Shrimad Bhagavad Gita Saar Full Summary in Hindi
श्रीमद्भगवद्गीता का संपूर्ण सार: जीवन जीने की सर्वश्रेष्ठ कला और श्रीकृष्ण की शिक्षाएं।



भगवद गीता सार

क्यों व्यर्थ की चिंता करते हो ? 
किससे व्यर्थ डरते हो ? 
कौन तुम्हें मार सक्ता है? 
आत्मा ना पैदा होती है, न मरती है।

जो हुआ , वह अच्छा हुआ, 
जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, 
जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा। 
तुम भूत का पश्चाताप न करो। 
भविष्य की चिन्ता न करो। वर्तमान चल रहा है।

तुम्हारा क्या गया, जो तुम रोते हो? 
तुम क्या लाए थे, जो तुमने खो दिया? 
तुमने क्या पैदा किया था, जो नाश हो गया? 
न तुम कुछ लेकर आये, जो लिया यहीं से लिया। 
जो दिया, यहीं पर दिया। 
जो लिया, इसी (भगवान) से लिया। 
जो दिया, इसी को दिया।

खाली हाथ आए और खाली हाथ चले। 
जो आज तुम्हारा है, कल और किसी का था, 
परसों किसी और का होगा। 
तुम इसे अपना समझ कर मग्न हो रहे हो। 
बस यही प्रसन्नता तुम्हारे दु:खों का कारण है।

परिवर्तन संसार का नियम है। 
जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वही तो जीवन है। 
एक क्षण में तुम करोड़ों के स्वामी बन जाते हो, 
दूसरे ही क्षण में तुम दरिद्र हो जाते हो। 
मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना-पराया, मन से मिटा दो,
 फिर सब तुम्हारा है, तुम सबके हो।

न यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो।
 यह अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी, आकाश से बना है 
और इसी में मिल जायेगा। 
परन्तु आत्मा स्थिर है - फिर तुम क्या हो?

तुम अपने आपको भगवान के अर्पित करो।
 यही सबसे उत्तम सहारा है। 
जो इसके सहारे को जानता है 
वह भय, चिन्ता, शोक से सर्वदा मुक्त है।

जो कुछ भी तू करता है
उसे भगवान के अर्पण करता चल। 
ऐसा करने से सदा जीवन-मुक्त का आनंन्द अनुभव करेगा।




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Introduction

श्रीमद्भगवद्गीता का संपूर्ण सार और जीवन दर्शन

स्वागत है Gita Hindi के इस पावन आध्यात्मिक मंच पर। श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक पूर्ण कला है। कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में जब अर्जुन विषाद और मोह से घिर गए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जो दिव्य उपदेश दिए, वही गीता के रूप में आज हमारे सामने हैं। इस वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य Gita Hindi के माध्यम से ईश्वरीय ज्ञान को आप तक सरल और शुद्ध रूप में पहुँचाना है।

महत्वपूर्ण संदेश: कर्म ही पूजा है

गीता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश 'निष्कॉम कर्म' है। श्रीकृष्ण कहते हैं— "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" अर्थात मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फल पर नहीं। आज के समय में जब तनाव और असफलता का डर सताता है, तब Gita Hindi में वर्णित ये उपदेश हमें असीम मानसिक शांति और नई दिशा प्रदान करते हैं।

ज्ञान, भक्ति और कर्म का समन्वय

गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, जो मुख्य रूप से तीन मार्गों पर आधारित हैं। हम यहाँ प्रयास करते हैं कि पाठक इन तीनों मार्गों के अंतर और महत्व को गहराई से समझ सकें:

  • आत्मज्ञान और परमात्मा का मार्ग: स्वयं को जानने की प्रक्रिया।
  • ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण: भक्ति और श्रद्धा का मार्ग।
  • बिना फल की चिंता किए कर्तव्य: कर्म योग का सिद्धांत।

आज के आधुनिक जीवन में गीता की प्रासंगिकता

अक्सर लोग सोचते हैं कि गीता केवल सन्यासियों के लिए है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। Gita Hindi के विस्तृत लेखों द्वारा आप समझ पाएंगे कि यह एक गृहस्थ, छात्र और कामकाजी व्यक्ति के लिए कितनी जरूरी है। यह हमें क्रोध पर नियंत्रण रखना और कठिन समय में सही निर्णय लेना सिखाती है।

हमारी वेबसाइट gitahindi.com का उद्देश्य

हमारी वेबसाइट पर हम प्रत्येक श्लोक का गहराई से विश्लेषण करते हैं। हम महाभारत के उन प्रसंगों को भी उजागर करते हैं जिनका सीधा संबंध उपदेशों से है, जैसे राजा शांतनु का इतिहास और कुरुवंश का उतार-चढ़ाव। हमारा प्रयास है कि Gita Hindi के सभी पाठकों को केवल अनुवाद न मिले, बल्कि वे जीवन के 'तत्व ज्ञान' को भी आत्मसात करें।

अध्यात्म की इस पावन यात्रा में हमारे साथ जुड़ें और अपने जीवन को श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन से आलोकित करें।