अर्जुन-प्रश्न
Gita Hindi Ch 2 (51-60): अध्याय 2 श्लोक 51-60: स्थितप्रज्ञ
दुख में उद्वेग रहित और सुख में आसक्ति रहित व्यक्ति ही वास्तविक ज्ञानी है। श्लोक 51 संस्कृत: कर्मजं बुद्धियुक…
दुख में उद्वेग रहित और सुख में आसक्ति रहित व्यक्ति ही वास्तविक ज्ञानी है। श्लोक 51 संस्कृत: कर्मजं बुद्धियुक…
"अशांतस्य कुतः सुखम्"—जो व्यक्ति मन से अशांत है, उसे सुख कहाँ से मिल सकता है? श्रीमद्भगवद्गीता - अ…
सुख-दुख और हार-जीत को समान समझकर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ; यही कर्मों के बंधन से मुक्ति का मार्ग है। श्लोक …
श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 2 (श्लोक 21-30) श्लोक 21 संस्कृत: वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम् । कथं स पुरुष…
आत्मा न कभी जन्म लेती है और न कभी मरती है; शरीर के नष्ट होने पर भी वह नष्ट नहीं होती। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्…
जब मोह ने अर्जुन को घेर लिया, तब उसने श्रीकृष्ण की शरण ली और "मैं आपका शिष्य हूँ" कहकर मार्गदर्शन …
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