कर्मयोग
Gita Hindi Ch 2 (31-40): अध्याय 2 श्लोक 31-40: स्वधर्म-योग
सुख-दुख और हार-जीत को समान समझकर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ; यही कर्मों के बंधन से मुक्ति का मार्ग है। श्लोक …
सुख-दुख और हार-जीत को समान समझकर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ; यही कर्मों के बंधन से मुक्ति का मार्ग है। श्लोक …
श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 2 (श्लोक 21-30) श्लोक 21 संस्कृत: वेदाविनाशिनं नित्यं य एनमजमव्ययम् । कथं स पुरुष…
आत्मा न कभी जन्म लेती है और न कभी मरती है; शरीर के नष्ट होने पर भी वह नष्ट नहीं होती। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्…
जब मोह ने अर्जुन को घेर लिया, तब उसने श्रीकृष्ण की शरण ली और "मैं आपका शिष्य हूँ" कहकर मार्गदर्शन …
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