कर्मसंन्यासयोग (Chapter 5)
Gita Hindi Ch 5 (21-29): अध्याय 5 श्लोक 21-29: परम शांति
इन्द्रियों से मिलने वाले भोग अस्थायी और दुख के स्रोत हैं, सच्चा सुख केवल आत्मा के भीतर है। श्रीमद्भगवद्गीता -…
इन्द्रियों से मिलने वाले भोग अस्थायी और दुख के स्रोत हैं, सच्चा सुख केवल आत्मा के भीतर है। श्रीमद्भगवद्गीता -…
ज्ञानी सबमें एक ही परमात्मा को देखता है, चाहे वह विद्यावान ब्राह्मण हो या कोई पशु। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय …
कर्मयोगी संसार में ऐसे रहता है जैसे जल में कमल का पत्ता श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 5 (श्लोक 1-10) श्लोक 1 संस्…
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