अध्यात्म ज्ञान
Gita Hindi Ch 7 (21-30): अध्याय 7 श्लोक 21-30: आत्मसंयम
इच्छा और द्वेष के द्वंद्व से मुक्त होकर ही मनुष्य मुझे पा सकता है। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 7 (श्लोक 21-30) …
इच्छा और द्वेष के द्वंद्व से मुक्त होकर ही मनुष्य मुझे पा सकता है। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 7 (श्लोक 21-30) …
इन्द्रियों से मिलने वाले भोग अस्थायी और दुख के स्रोत हैं, सच्चा सुख केवल आत्मा के भीतर है। श्रीमद्भगवद्गीता -…
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