अहंकार-त्याग
Gita Hindi Ch 3 (21-30): अध्याय 3 श्लोक 21-30: श्रेष्ठ आचरण
श्रेष्ठ पुरुष जैसा आचरण करता है, सारा संसार वैसा ही करने लगता है। श्लोक 21 संस्कृत: यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्…
श्रेष्ठ पुरुष जैसा आचरण करता है, सारा संसार वैसा ही करने लगता है। श्लोक 21 संस्कृत: यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्…
नियतं कुरु कर्म त्वं"—अपना निर्धारित कर्तव्य करना, कर्म न करने से कहीं श्रेष्ठ है। श्लोक 1 संस्कृत: ज्…
दुख में उद्वेग रहित और सुख में आसक्ति रहित व्यक्ति ही वास्तविक ज्ञानी है। श्लोक 51 संस्कृत: कर्मजं बुद्धियुक…
सुख-दुख और हार-जीत को समान समझकर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ; यही कर्मों के बंधन से मुक्ति का मार्ग है। श्लोक …
जब मोह ने अर्जुन को घेर लिया, तब उसने श्रीकृष्ण की शरण ली और "मैं आपका शिष्य हूँ" कहकर मार्गदर्शन …
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