संदेश

भगवद्गीता अध्याय 3 (21-30): श्रेष्ठ पुरुष का आचरण और अहंकार का त्याग

भगवद्गीता अध्याय 3 श्लोक 1-10: कर्मयोग का रहस्य और मिथ्याचार का खंडन

भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 51-60: स्थितप्रज्ञ पुरुष के लक्षण और आत्म-संतुष्टि

भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 31-40: स्वधर्म का पालन और कर्मयोग की शक्ति

भगवद्गीता अध्याय 2 श्लोक 1-10: अर्जुन का आत्म-समर्पण और सांख्ययोग का आरंभ