Gita Hindi Ch 9 (21-34): अध्याय 9 श्लोक 21-34
मैं ही सबका आदि कारण हूँ; मुझसे ही यह संपूर्ण जगत चेष्टा करता है। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 9 (श्लोक 21-34) श…
मैं ही सबका आदि कारण हूँ; मुझसे ही यह संपूर्ण जगत चेष्टा करता है। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 9 (श्लोक 21-34) श…
इच्छा और द्वेष के द्वंद्व से मुक्त होकर ही मनुष्य मुझे पा सकता है। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 7 (श्लोक 21-30) …
मुझसे श्रेष्ठ और कुछ नहीं; पूरा जगत मुझमें वैसे ही पिरोया है जैसे धागे में मणियाँ। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय …
कल्याण के मार्ग पर चलने वाले की कभी दुर्गति नहीं होती। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 6 (श्लोक 31-47) श्लोक 31 संस…
जो मुझे सबमें देखता है और सबको मुझमें देखता है, उसके लिए मैं कभी ओझल नहीं होता। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 6 (…
योग अति का नहीं, संतुलन का मार्ग है श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 6 (श्लोक 11-20) श्लोक 11 संस्कृत: शुचौ देशे प्…
आपका मन ही आपका सबसे बड़ा मित्र है और सबसे बड़ा शत्रु भी। श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 6 (श्लोक 1-10) श्लोक 1 संस…
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