
April 2026 Festivals Calendar Hanuman Jayanti Akshaya Tritiya gitahindi.com
1. हनुमान जयंती और चैत्र पूर्णिमा (02 अप्रैल, गुरुवार)
अप्रैल महीने की शुरुआत ही भक्ति के चरम से हो रही है, क्योंकि इस दिन संकटमोचन हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। चैत्र पूर्णिमा के पावन स्नान के साथ भक्त सुंदरकांड और हनुमान चालीसा के पाठ से पवनपुत्र की आराधना करते हैं। यह दिन मन की शक्ति और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पाने का सबसे बड़ा अवसर है।
2. संकष्टी चतुर्थी - गणेश व्रत (05 अप्रैल, रविवार)
भगवान गणेश को समर्पित यह तिथि 'विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी' के नाम से जानी जाती है। रविवार का दिन होने के कारण इसका महत्व और बढ़ जाता है। इस दिन व्रत रखने और चंद्रमा को अर्घ्य देने से जीवन की कठिन से कठिन बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
3. कालाष्टमी - भैरव बाबा की पूजा (10 अप्रैल, शुक्रवार)
भगवान शिव के रौद्र स्वरूप 'काल भैरव' की उपासना के लिए कालाष्टमी का दिन अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। शुक्रवार का संयोग इसे शक्ति की साधना के लिए भी उत्तम बनाता है। इस दिन भैरव बाबा की पूजा करने से शत्रुओं का नाश होता है और भय से मुक्ति मिलती है।
4. वरुथिनी एकादशी - मोक्ष का मार्ग (13 अप्रैल, सोमवार)
भगवान विष्णु के सबसे पुण्यकारी व्रतों में वरुथिनी एकादशी का स्थान सर्वोपरि है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन का उपवास रखने से व्यक्ति को दस सहस्र वर्षों की तपस्या के समान फल मिलता है। यह व्रत सौभाग्य प्रदान करने वाला और समस्त पापों का शमन करने वाला माना गया है।
5. बैसाखी, मेष संक्रांति और सौर नववर्ष (14 अप्रैल, मंगलवार)
यह दिन सांस्कृतिक और खगोलीय दृष्टि से एक महा-संगम है। सूर्य देव इसी दिन मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिससे सौर कैलेंडर के नए वर्ष की शुरुआत होगी। उत्तर भारत में इसे बैसाखी के रूप में नई फसल की खुशी में मनाया जाता है, जो जीवन में नए उत्साह और समृद्धि का प्रतीक है।
6. मासिक शिवरात्रि और प्रदोष व्रत (15 अप्रैल, बुधवार)
बुधवार के दिन शिवरात्रि और प्रदोष का एक साथ होना शिव भक्तों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में किया गया महादेव का अभिषेक कर्ज से मुक्ति दिलाने और स्वास्थ्य लाभ देने में अमोघ माना जाता है। यह रात्रि जागरण और शिव भक्ति का विशेष समय है।
7. वैशाख अमावस्या - पितृ तर्पण (17 अप्रैल, शुक्रवार)
वैशाख मास की अमावस्या पितरों की शांति और दान-पुण्य के लिए समर्पित है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर पितरों के निमित्त तर्पण और दीपदान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। यह दिन वंश वृद्धि और परिवार के कल्याण की कामना के लिए श्रेष्ठ है।
8. अक्षय तृतीया और परशुराम जयंती (19 अप्रैल, रविवार)
अप्रैल का सबसे शुभ और 'अबूझ मुहूर्त' वाला दिन अक्षय तृतीया है। इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य या निवेश कभी नष्ट नहीं होता। साथ ही, इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है, जो ब्राह्मण और क्षत्रिय गुणों के अद्भुत संगम हैं।
9. विनायक चतुर्थी (21 अप्रैल, मंगलवार)
शुक्ल पक्ष की यह चतुर्थी भगवान गणेश के नए कार्यों के आरंभ के लिए जानी जाती है। मंगलवार का दिन होने के कारण इसे 'अंगारकी चतुर्थी' जैसा फल देने वाला माना जाता है। इस दिन गणेश जी को लाल सिंदूर और दूर्वा अर्पित करने से सभी कार्य निर्विघ्न संपन्न होते हैं।
10. गंगा सप्तमी (23 अप्रैल, गुरुवार)
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन माँ गंगा स्वर्ग से भगवान शिव की जटाओं में उतरी थीं। गंगा सप्तमी के दिन गंगाजल का स्पर्श और स्नान मनुष्य के सात जन्मों के पापों को धो देता है। यह दिन आध्यात्मिक शुद्धिकरण और पवित्रता का संचार करने वाला है।
11. सीता नवमी - जानकी जयंती (25 अप्रैल, शनिवार)
माता सीता के प्राकट्य दिवस के रूप में यह पर्व बड़े ही उल्लास से मनाया जाता है। सीता नवमी का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए अखंड सौभाग्य का वरदान देने वाला है। माँ सीता का जीवन सहनशीलता, पवित्रता और त्याग की सबसे बड़ी मिसाल है।
12. मोहिनी एकादशी - माया से मुक्ति (26 अप्रैल, रविवार)
भगवान विष्णु ने इसी दिन मोहिनी रूप धारण कर असुरों से अमृत की रक्षा की थी। इस व्रत को रखने से मनुष्य संसार के मोह-माया के बंधनों से मुक्त होता है और उसके भीतर सात्विक विचारों का उदय होता है। यह एकादशी मानसिक शांति के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
13. सोम प्रदोष व्रत (27 अप्रैल, सोमवार)
सोमवार के दिन प्रदोष व्रत का होना 'शिव-शक्ति' के पूर्ण मिलन को दर्शाता है। यह व्रत विशेष रूप से चंद्रमा से जुड़े दोषों को दूर करने और मन को एकाग्र करने के लिए रखा जाता है। प्रदोष काल में शिव आराधना से भक्तों की सभी मनोकामनाएं शीघ्र पूर्ण होती हैं।
14. नृसिंह जयंती - अधर्म पर विजय (28 अप्रैल, मंगलवार)
भगवान विष्णु ने भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए आधे सिंह और आधे मनुष्य का स्वरूप धारण किया था। नृसिंह जयंती हमें सिखाती है कि ईश्वर अपने भक्तों की पुकार पर हर जगह प्रकट हो सकते हैं। यह पर्व अहंकार के विनाश और सत्य की जीत का महापर्व है।
15. वैशाख पूर्णिमा - बुद्ध पूर्णिमा (30 अप्रैल, गुरुवार)
अप्रैल महीने का समापन भगवान बुद्ध के प्रकाश के साथ होता है। वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा भी कहा जाता है क्योंकि इसी दिन बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति और महापरिनिर्वाण हुआ था। यह दिन विश्व शांति, अहिंसा और मानवता के प्रति करुणा का संदेश देता है।