अध्याय 10 श्लोक 41 - 42 | विभूतियोग | श्रीमद्भगवद्गीता हिंदी

भगवान श्रीकृष्ण अपनी उंगली पर पूरे ब्रह्मांड को एक अंश की तरह धारण किए हुए हैं और अर्जुन विस्मय से देख रहे हैं।
मैं इस समस्त जगत को अपने एक अंश मात्र से धारण करके स्थित हूँ।


श्रीमद्भगवद्गीता - अध्याय 10 (श्लोक 41-42)

श्लोक 41

संस्कृत: यद्यद्विभूतिमत्सत्त्वं श्रीमदूर्जितमेव वा । तत्तदेवावगच्छ त्वं मम तेजोंऽशसम्भवम्‌ ॥

भावार्थ: जो-जो भी विभूतियुक्त (ऐश्वर्ययुक्त), कांतियुक्त और शक्तियुक्त वस्तु है, उस-उस को तू मेरे तेज के एक अंश की ही अभिव्यक्ति जान।

विश्लेषण: भगवान ने यहाँ एक 'यूनिवर्सल फॉर्मूला' दे दिया है। दुनिया में कहीं भी यदि हमें कोई बहुत सुंदर, बहुत शक्तिशाली या बहुत बुद्धिमान व्यक्ति या वस्तु दिखे, तो हमें समझ लेना चाहिए कि वह परमात्मा के अनंत तेज का केवल एक छोटा सा हिस्सा मात्र है।


श्लोक 42

संस्कृत: अथवा बहुनैतेन किं ज्ञातेन तवार्जुन । विष्टभ्याहमिदं कृत्स्नमेकांशेन स्थितो जगत्‌ ॥

भावार्थ: अथवा हे अर्जुन! इस बहुत जानने से तेरा क्या प्रयोजन है? मैं इस संपूर्ण जगत्‌ को अपनी योगशक्ति के एक अंश मात्र से धारण करके स्थित हूँ।

विश्लेषण: अध्याय के अंत में भगवान अपनी असीमता का परिचय देते हैं। वे कहते हैं कि इतनी सारी विभूतियों को अलग-अलग याद रखने की जरूरत नहीं है; बस इतना जान लो कि यह पूरा अनंत ब्रह्मांड मेरे एक छोटे से अंश (एक पैर) पर टिका हुआ है। मेरी महिमा इससे कहीं अधिक विशाल है।

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Introduction

श्रीमद्भगवद्गीता का संपूर्ण सार और जीवन दर्शन

स्वागत है Gita Hindi के इस पावन आध्यात्मिक मंच पर। श्रीमद्भगवद्गीता केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक पूर्ण कला है। कुरुक्षेत्र के युद्ध मैदान में जब अर्जुन विषाद और मोह से घिर गए थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जो दिव्य उपदेश दिए, वही गीता के रूप में आज हमारे सामने हैं। इस वेबसाइट का मुख्य उद्देश्य Gita Hindi के माध्यम से ईश्वरीय ज्ञान को आप तक सरल और शुद्ध रूप में पहुँचाना है।

महत्वपूर्ण संदेश: कर्म ही पूजा है

गीता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश 'निष्कॉम कर्म' है। श्रीकृष्ण कहते हैं— "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" अर्थात मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फल पर नहीं। आज के समय में जब तनाव और असफलता का डर सताता है, तब Gita Hindi में वर्णित ये उपदेश हमें असीम मानसिक शांति और नई दिशा प्रदान करते हैं।

ज्ञान, भक्ति और कर्म का समन्वय

गीता में 18 अध्याय और 700 श्लोक हैं, जो मुख्य रूप से तीन मार्गों पर आधारित हैं। हम यहाँ प्रयास करते हैं कि पाठक इन तीनों मार्गों के अंतर और महत्व को गहराई से समझ सकें:

  • आत्मज्ञान और परमात्मा का मार्ग: स्वयं को जानने की प्रक्रिया।
  • ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण: भक्ति और श्रद्धा का मार्ग।
  • बिना फल की चिंता किए कर्तव्य: कर्म योग का सिद्धांत।

आज के आधुनिक जीवन में गीता की प्रासंगिकता

अक्सर लोग सोचते हैं कि गीता केवल सन्यासियों के लिए है, लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत है। Gita Hindi के विस्तृत लेखों द्वारा आप समझ पाएंगे कि यह एक गृहस्थ, छात्र और कामकाजी व्यक्ति के लिए कितनी जरूरी है। यह हमें क्रोध पर नियंत्रण रखना और कठिन समय में सही निर्णय लेना सिखाती है।

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हमारी वेबसाइट पर हम प्रत्येक श्लोक का गहराई से विश्लेषण करते हैं। हम महाभारत के उन प्रसंगों को भी उजागर करते हैं जिनका सीधा संबंध उपदेशों से है, जैसे राजा शांतनु का इतिहास और कुरुवंश का उतार-चढ़ाव। हमारा प्रयास है कि Gita Hindi के सभी पाठकों को केवल अनुवाद न मिले, बल्कि वे जीवन के 'तत्व ज्ञान' को भी आत्मसात करें।

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