कर्मयोग
Gita Hindi Ch 3 (11-20): अध्याय 3 श्लोक 11-20: सृष्टि चक्र
स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि लोक कल्याण (लोकसंग्रह) के लिए कर्म करना ही श्रेष्ठ मार्ग है। श्रीमद्भगवद्गीता - अ…
स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि लोक कल्याण (लोकसंग्रह) के लिए कर्म करना ही श्रेष्ठ मार्ग है। श्रीमद्भगवद्गीता - अ…
नियतं कुरु कर्म त्वं"—अपना निर्धारित कर्तव्य करना, कर्म न करने से कहीं श्रेष्ठ है। श्लोक 1 संस्कृत: ज्…
कर्म पर तुम्हारा अधिकार है, फल पर नहीं"—भगवान श्रीकृष्ण का कालजयी संदेश। श्लोक 41 संस्कृत: व्यवसायात्म…
सुख-दुख और हार-जीत को समान समझकर युद्ध के लिए तैयार हो जाओ; यही कर्मों के बंधन से मुक्ति का मार्ग है। श्लोक …
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