प्रस्तावना: पवित्र भगवद्गीता (The Bhagavad Gita)
श्रीमद्भगवद्गीता संसार का सबसे महान ग्रंथ है जो मनुष्य को मोह से निकालकर कर्तव्य पथ पर खड़ा करता है। जब अर्जुन कुरुक्षेत्र की युद्धभूमि में अपनों के सामने कमजोर पड़ गए, तब भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें जो दिव्य ज्ञान दिया, वही Bhagavad Gita के रूप में अमर हो गया। इस गाथा की शुरुआत
श्रीमद्भगवद्गीता यथा रूप (Bhagavad Gita As It Is)
आज के समय में Bhagavad Gita by Srila Prabhupada द्वारा प्रस्तुत 'यथा रूप' संस्करण दुनिया भर में प्रसिद्ध है। भगवान के उपदेशों को बिना किसी मिलावट के समझना ही वास्तविक ज्ञान है। गीता का मुख्य आधार
कर्मयोग: सफलता का महामंत्र (Karma Yoga)
Shrimad Bhagwat Geeta का सबसे बड़ा संदेश है—'कर्म करो, फल की चिंता मत करो'। आज के दौर में युवा अक्सर परिणामों को लेकर तनाव में रहते हैं, उनके लिए
ज्ञान और कर्म का अद्भुत संगम
केवल मेहनत काफी नहीं है, उसके साथ सही दिशा और ज्ञान का होना भी जरूरी है।
विश्वरूप दर्शन: ईश्वर की विराट सत्ता
जब अर्जुन ने भगवान के वास्तविक स्वरूप को देखने की इच्छा जताई, तो श्री कृष्ण ने अपना
मन पर विजय: ध्यान योग का महत्व
आज की पीढ़ी (Millennials) के लिए एकाग्रता सबसे बड़ी चुनौती है। गीता का
भक्ति और पूर्ण शरणागति (Bhakti Yoga)
गीता का निष्कर्ष
गीताप्रेस और महाभारत का इतिहास (Gita Press)
Gita Press Gorakhpur ने सनातन धर्म के प्रचार में जो योगदान दिया है, वह अतुलनीय है। उनकी 'कल्याण' पत्रिका और Shrimad Bhagwat Geeta in Hindi ने घर-घर में आध्यात्म की ज्योत जलाई है। हस्तिनापुर के इतिहास को समझने के लिए
निष्कर्ष
gitahindi.com पर हमारा लक्ष्य आपको इस दिव्य अमृत से जोड़ना है। चाहे आप Bhagavad Gita in English पढ़ रहे हों या हिंदी में, संदेश एक ही है—अपने भीतर की
