गरुड़ पुराण नौवां अध्याय: दशगात्र पिंड दान विधि (Garud Puran Adhyay 9 All 95 Slokas)

 

गरुड़ पुराण नौवां अध्याय दशगात्र पिंड दान विधि और श्राद्ध कर्म चित्र

गरुड़ पुराण के नवम अध्याय में प्रेत योनि की मुक्ति और शरीर की पुनः पुष्टि के लिए प्रथम दिन से लेकर दशम दिन तक दिए जाने वाले 'दशगात्र पिंडदान' की संपूर्ण विधि का वर्णन किया गया है।

गरुड़ पुराण नवम अध्याय: 1 से 95 तक के संपूर्ण श्लोक एवं हिंदी अनुवाद

श्लोक 1

गरुड़ उवाच

श्रुतं मया महाविष्णो आतिवाहिकवर्णनम्।

दशगात्रस्य विधिं ब्रूहि कथमस्य च पूजनम्॥१॥

  • हिंदी अनुवाद: गरुड़ जी बोले—हे महाविष्णु! मैंने आतिवाहिक शरीर का वर्णन सुन लिया। अब दशगात्र की विधि और उसके पूजन का विधान विस्तार से बताइए।

श्लोक 2

श्रीभगवानुवाच

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रस्य लक्षणम्।

यत्कृतेन नरो मुच्यते प्रेतत्वान्महातनुः॥२॥

  • हिंदी अनुवाद: श्री भगवान बोले—हे गरुड़! सुनो, अब मैं दशगात्र के उस लक्षण को कहता हूँ, जिसके करने से महान तनु वाला जीव प्रेत योनि से मुक्त हो जाता है।

श्लोक 3

प्रथमे दिने तु यः पिण्डो दीयते मृतकान्तके।

तेन तस्य भवेत् प्रीतिः प्रेतदेहस्य शाश्वती॥३॥

  • हिंदी अनुवाद: मृतक के अंत में पहले दिन जो पिंडदान दिया जाता है, उससे प्रेत देह को शाश्वती (स्थायी) तृप्ति और प्रीति प्राप्त होती है।

श्लोक 4

द्वितीये तु ततो दीयते पिण्डो वै कल्पितः शुभः।

चर्मणो मांसवृद्ध्यर्थं प्रेतस्य तु विशेषतः॥४॥

  • हिंदी अनुवाद: दूसरे दिन विशेष रूप से कल्पित और शुभ पिंडदान दिया जाता है, जो प्रेत के शरीर में चर्म और मांस की वृद्धि के लिए होता है।

श्लोक 5

तृतीये च तथा पिण्डो दीयते विधिवत् सुधीः।

अस्थिसञ्चयनादूर्ध्वं मज्जास्याः पुष्टिकारकः॥५॥

  • हिंदी अनुवाद: तीसरे दिन बुद्धिमान जन विधिपूर्वक पिंडदान देते हैं, जो अस्थि संचय के पश्चात मज्जा और हड्डियों की पुष्टि करने वाला होता है।

श्लोक 6

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥६॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 6)।

श्लोक 7

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥७॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 7)।

श्लोक 8

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥८॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 8)।

श्लोक 9

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥९॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 9)।

श्लोक 10

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥१०॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 10)।

श्लोक 11

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥११॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 11)।

श्लोक 12

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥१२॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 12)।

श्लोक 13

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥१३॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 13)।

श्लोक 14

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥१४॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 14)।

श्लोक 15

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥१५॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 15)।

श्लोक 16

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥१६॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 16)।

श्लोक 17

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥१७॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 17)।

श्लोक 18

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥१८॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 18)।

श्लोक 19

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥१९॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 19)।

श्लोक 20

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥२०॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 20)।

श्लोक 21

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥२१॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 21)।

श्लोक 22

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥२२॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 22)।

श्लोक 23

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥२३॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 23)।

श्लोक 24

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥२४॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 24)।

श्लोक 25

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥२५॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 25)।

श्लोक 26

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥२६॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 26)।

श्लोक 27

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥२७॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 27)।

श्लोक 28

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥२८॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 28)।

श्लोक 29

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥२९॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 29)।

श्लोक 30

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥३०॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 30)।

श्लोक 31

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥३१॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 31)।

श्लोक 32

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥३२॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 32)।

श्लोक 33

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥३३॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 33)।

श्लोक 34

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥३४॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 34)।

श्लोक 35

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥३५॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 35)।

श्लोक 36

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥३६॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 36)।

श्लोक 37

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥३७॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 37)।

श्लोक 38

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥३८॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 38)।

श्लोक 39

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥३९॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 39)।

श्लोक 40

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥४०॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 40)।

श्लोक 41

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥४१॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 41)।

श्लोक 42

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥४२॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 42)।

श्लोक 43

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥४३॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 43)।

श्लोक 44

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥४४॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 44)।

श्लोक 45

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥४५॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 45)।

श्लोक 46

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥४६॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 46)।

श्लोक 47

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥४७॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 47)।

श्लोक 48

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥४८॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 48)।

श्लोक 49

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥४९॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 49)।

श्लोक 50

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥५०॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 50)।

श्लोक 51

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥५१॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 51)।

श्लोक 52

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥५२॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 52)।

श्लोक 53

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥५३॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 53)।

श्लोक 54

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥५४॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 54)।

श्लोक 55

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥५५॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 55)।

श्लोक 56

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥५६॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 56)।

श्लोक 57

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥५७॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 57)।

श्लोक 58

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥५८॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 58)।

श्लोक 59

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥५९॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 59)।

श्लोक 60

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥६०॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 60)।

श्लोक 61

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥६१॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 61)।

श्लोक 62

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥६२॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 62)।

श्लोक 63

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥६३॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 63)।

श्लोक 64

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥६४॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 64)।

श्लोक 65

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥६५॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 65)।

श्लोक 66

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥६६॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 66)।

श्लोक 67

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥६७॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 67)।

श्लोक 68

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥६८॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 68)।

श्लोक 69

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥६९॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 69)।

श्लोक 70

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥७०॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 70)।

श्लोक 71

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥७१॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 71)।

श्लोक 72

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥७२॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 72)।

श्लोक 73

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥७३॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 73)।

श्लोक 74

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥७४॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 74)।

श्लोक 75

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥७५॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 75)।

श्लोक 76

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥७६॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 76)।

श्लोक 77

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥७७॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 77)।

श्लोक 78

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥७८॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 78)।

श्लोक 79

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥७९॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 79)।

श्लोक 80

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥८०॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 80)।

श्लोक 81

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥८१॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 81)।

श्लोक 82

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥८२॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 82)।

श्लोक 83

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥८३॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 83)।

श्लोक 84

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥८४॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 84)।

श्लोक 85

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥८५॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 85)।

श्लोक 86

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥८६॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 86)।

श्लोक 87

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥८७॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 87)।

श्लोक 88

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥८८॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 88)।

श्लोक 89

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥८९॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 89)।

श्लोक 90

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥९०॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 90)।

श्लोक 91

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥९१॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 91)।

श्लोक 92

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥९२॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 92)।

श्लोक 93

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥९३॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 93)।

श्लोक 94

शृणु तार्क्ष्य प्रवक्ष्यामि दशगात्रे च यत्कृतम्।

पिण्डदानप्रभावेन प्रेतो मुच्यते बन्धनात्॥९४॥

  • हिंदी अनुवाद: हे गरुड़! सुनो, दशगात्र में जो विधान किया जाता है, पिंडदान के प्रभाव से प्रेत उस बंधन से मुक्त हो जाता है (अध्याय 9, श्लोक 94)।

श्लोक 95

इति श्रीगरुड़पुराणे सारोद्धारे दशगात्रपिण्डदानविधिरनाम नवमोऽध्यायः॥९५॥

  • हिंदी अनुवाद: इस प्रकार श्री गरुड़ पुराण सारोद्धार का 'दशगात्र पिंड दान विधि' नामक नौवां अध्याय संपूर्ण हुआ।

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